गर्भवती आरोग्य कैसे रहे

शास्त्रों और पुराणों के अनुसार गर्भवती महिलाओं को अपने स्वास्थ्य जीवन के लिए होने वाली संतान की स्थिति स्वच्छता सुंदरता संस्कारवान एवं दीर्घायु हेतु गर्भावस्था में निम्न बातों पर ध्यान देना चाहिए

इस प्रकार गर्भवती महिलाओं के द्वारा किए गए क्रियाकलाप खानपान बोलचाल श्रवण मनन आदि का गर्भ पर गहरा प्रभाव पड़ता है यहां महाभारत की एक कहानी याद आती है कि वीर अभिमन्यु जब माता के गर्भ में था तब उसने अपने पिता अर्जुन द्वारा चक्रव्यूह तोड़ने की कथा सुनी थी पर चक्र से निकलने की कथा के समय माता को नींद आ जाने से पिता ने आगे की कहानी सुनानी बंद कर दी थी इसलिए चक्रव्यूह तोड़ना तो सीख लिया था पर निकालना नहीं सीखा पाया यही कारण है कि वह यू में मारा गया अतः गर्भावस्था के समय महिलाओं को बहुत सावधान रहकर जीवन यापन करना चाहिए गर्भवती माता का व्यवहार ही बच्चे का व्यवहार निर्मित करता है

(१) गर्भवती को हमेशा सुख, दुख ,रंजन ,क्रोध ,से दूर रहकर प्रसन्न चित्त रहना चाहिए। (२)किसी वस्तु को चोरी चोरी खाने की चेष्टा ना करें ना किसी वस्तु को चुराने का भाव मन में लाएं हमेशा स्वास्तिक धार्मिक एवं परोपकारी भाव रखें क्योंकि इसका प्रभाव इस अवस्था शिशु पर पड़ता है जैसे विचार भाव गर्भवती के रहेंगे वैसे ही गर्व की प्रकृति निर्मित होती है। (३)सड़े गले गंदे पदार्थ एवं रात का बचा बासी भोजन ना खाएं शुद्ध स्वास्थ्य एवं भूख से कम भोजन करें। (४)भांग मदिरा धूम्रपान एवं अन्य नशीले पदार्थ का सेवन ना करें। (५) अश्लील गंदा साहित्य ना पड़े ना अश्लील सिनेमा आदि देखें अपने शयनकक्ष में भद्दे गंदे चित्र ना लगाएं नाउन का अवलोकन करें भगवान के संत महापुरुषों के तथा वीर सपूतों के सुंदर चित्र लगाएं। (६) दिन में अधिक ना सोए रात में अधिक देर तक जागरण ना करें। (७) गर्भ अवस्था मैं महिलाओं को बार बार सीढ़ियां उतरना चढ़ना नहीं चाहिए ना भारी वजन उठाना चाहिए तथा हाथी घोड़ा ऊंट की सवारी करना भी वर्जित है। (८)गर्भवती महिलाओं को नाव में बैठकर नदी पार करना या जलाशय की सैर करना मना है ना अकेले में किसी पेड़ के नीचे सोना चाहिए।

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