Author: Hair stylist Shankar
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नाड़ी विज्ञान
वात शरीर सा वायु दोष के शरीर के उत्तम मार्ग से मूलाधार तक क्रमसा पांच भेद किए हैं जो इस प्रकार हैं।
आयुर्वेद के मूल स्तंभ महा पंचभूत ही है शरीर में वात, पित्त, और कफ के भी इन पांच भेदों के आधार पर प्रत्येक दोष के पांच पांच भेद किए गए है तथा इनके आधार पर शरीर में स्थान गुण एवं धर्म का वर्णन कर उनके प्राकृतिक कर्म बताए हैं यही प्राकृत कर्म जब सम रहते हैं निरोगी रहती है और इसके विकृत हो जाने पर आप प्राकृत अवस्था अथवा अस्वस्थता हो जाता है चिकित्सा सिद्धांत में भी पंचमहाभूत ओं की प्रधानता होने से जो मूलभूत चिकित्सा हैउसमें छेड़ हुए दोष एवं महा भूतों की वृद्धि करना और जो बड़े हुए उनका हराश करना तथा समय का पालन करना ही चिकित्सा है।
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चोट रक्त स्राव हड्डी टूटना
हमारे शरीर में रक्त संचालन करने वाली नसों का जलसा बिछा हुआ है यह नसीब तीन प्रकार की होती हैं धमनी शिरा और महीन कोशिकाएं धमनी का कार्य पूरे शरीर में शुद्ध रक्त की आपूर्ति करना तथा शिरा का कार्य शरीर में अशुद्ध रक्त इकट्ठा करके हृदय में वापस शुद्ध होने हेतु भेजना कोशिकाएं बारीक धागे जैसी होती हैं यह शिरा और धमनी से संबंध होती हैं और त्वचा तक इसका प्रसार होता है चोट लग जाने पर धमनी का रक्त शरीर के बाहर उछल उछल कर निकलता है इसका रंग शुल्क चमकीला लाभ होता है सिर आकार रक्त गहरे रंग का होता है और सामान रूप से बाहर निकलता है कोशिकाओं का रक्त नन्ही नन्ही बूंदों के रूप में धीरे-धीरे निकलता है। (१)घुटनों में चोट लगने पर यदि धमनी का रक्त निकल रहा हो तो घायल अंकों ऊपर करके रखना चाहिए यदि शीरा से रक्त प्रभाव हो रहा हो तो उसको नीचे करके रखें इससे रक्त प्रभाव जल्दी बंद हो जाएगा
(२) घाव को ठंडे पानी से धो कर उस पर बर्फ रखें और ठंडे पानी से भीगे कपड़े की पट्टी बांधे इससे रक्त स्राव जल्दी बंद होगा। (३)चोट के सभी ऊपर की और दबाव रखने पर भी रक्त की कम मात्रा निकलेगी पट्टी बांधने तक चोट को दबाकर रक्त का बहना बंद करने का प्रयास करें। (४)समान कोशिकाओं से रक्त स्राव हो रहा हो तो उंगली से कुछ देर तक दबा कर रखें डेटॉल या जीवाणु नासिक ढोल से साफ करके उस पर फिटकरी रखकर हल्की पट्टी बांधे सामान्य चोट पर फिटकरी छिड़ककर पट्टी बांध देने से रक्त रुक जाता है। (५) यदि नाक से रक्त स्राव हो रहा हो तो स्वच्छ हवादार स्थान में रोगी को बता दे सिर को पीछे की ओर लटका कर रखी हाथ को ऊपर की ओर कर दे गले और वृक्ष हाल के कपड़ों को ढीला कर दें नाक और गर्दन पर बर्फ का ठंडा पानी रखें मुंह को खुला रखकर श्वास लें और पैरों को गर्म पानी में रख दें इससे नासिका का रक्त शीघ्र रुक जाएगा
हड्डी टूटना
प्रिया दुर्घटना में अत्यधिक चोट लग जाने से रक्त स्राव अधिक होने के साथ ही कभी-कभी हड्डी भी टूट जाया करती है टूटी हड्डी के संदर्भ में कोशिश यह करनी चाहिए कि बिना छेड़छाड़ किए यथा स्थिति में घायल को शीघ्र चिकित्सालय पहुंचाएं हिलने डुलने से अधिक हानि पहुंच सकती है कभी-कभी टूटी हड्डी मास्को फाड़ कर बाहर निकल आती है ऐसी स्थिति में अत्यंत सावधानी रखने की जरूरत पड़ती है हड्डी टूटने की पहचान यह है कि 20 स्थान में दर्द होता है वह अंग बेकाबू हो जाता है पीड़ा लंबा या छोटा हो सकता है भीतरी रक्षा व मांसपेशियों के सूखने से सूजन आ जाती है हड्डी टूटने पर एक्स-रे करके सही स्थिति का आंकलन कर प्लास्टर आदि करना पड़ता है हड्डी टूटने की स्थिति में प्राथमिक उपचार इस प्रकार करनी चाहिए
(१)यदि जान पैर या हाथ की हड्डी टूटी हो तो बिना हिलाए बुलाए टूटे अंग पर इसके लिया लकड़ी की खपत थी दोनों और बांध कर रख दें और निकटवर्ती चिकित्सालय ले जाने की व्यवस्था करें रक्त निकल रहा हो तो उसे रोकने का प्रयास करना चाहिए। (२)हड्डी का सिरा टूटकर बाहर निकल गया हो तो ऐसी स्थिति में बिना हिलाए रखें और चिकित्सक को बुलाए। (३)सिर की हड्डी टूट गई हो तो सिर ऊंचा करके लेट आदि घाव पहुंचकर हल्की पट्टी बांधे सीने और गर्दन के वस्त्र ढीले कर दे उसे शांत और गर्म रखने का प्रयास करें तथा रोगी को सांत्वना देते रहें। (४)यदि रीड या कमर की हड्डी टूटी हो तो पड़ा रहने दे चिकित्सक को बुलाए अन्यथा अधिक गंभीर हानि पहुंच सकती है।
गर्भवती आरोग्य कैसे रहे
शास्त्रों और पुराणों के अनुसार गर्भवती महिलाओं को अपने स्वास्थ्य जीवन के लिए होने वाली संतान की स्थिति स्वच्छता सुंदरता संस्कारवान एवं दीर्घायु हेतु गर्भावस्था में निम्न बातों पर ध्यान देना चाहिए
इस प्रकार गर्भवती महिलाओं के द्वारा किए गए क्रियाकलाप खानपान बोलचाल श्रवण मनन आदि का गर्भ पर गहरा प्रभाव पड़ता है यहां महाभारत की एक कहानी याद आती है कि वीर अभिमन्यु जब माता के गर्भ में था तब उसने अपने पिता अर्जुन द्वारा चक्रव्यूह तोड़ने की कथा सुनी थी पर चक्र से निकलने की कथा के समय माता को नींद आ जाने से पिता ने आगे की कहानी सुनानी बंद कर दी थी इसलिए चक्रव्यूह तोड़ना तो सीख लिया था पर निकालना नहीं सीखा पाया यही कारण है कि वह यू में मारा गया अतः गर्भावस्था के समय महिलाओं को बहुत सावधान रहकर जीवन यापन करना चाहिए गर्भवती माता का व्यवहार ही बच्चे का व्यवहार निर्मित करता है
(१) गर्भवती को हमेशा सुख, दुख ,रंजन ,क्रोध ,से दूर रहकर प्रसन्न चित्त रहना चाहिए। (२)किसी वस्तु को चोरी चोरी खाने की चेष्टा ना करें ना किसी वस्तु को चुराने का भाव मन में लाएं हमेशा स्वास्तिक धार्मिक एवं परोपकारी भाव रखें क्योंकि इसका प्रभाव इस अवस्था शिशु पर पड़ता है जैसे विचार भाव गर्भवती के रहेंगे वैसे ही गर्व की प्रकृति निर्मित होती है। (३)सड़े गले गंदे पदार्थ एवं रात का बचा बासी भोजन ना खाएं शुद्ध स्वास्थ्य एवं भूख से कम भोजन करें। (४)भांग मदिरा धूम्रपान एवं अन्य नशीले पदार्थ का सेवन ना करें। (५) अश्लील गंदा साहित्य ना पड़े ना अश्लील सिनेमा आदि देखें अपने शयनकक्ष में भद्दे गंदे चित्र ना लगाएं नाउन का अवलोकन करें भगवान के संत महापुरुषों के तथा वीर सपूतों के सुंदर चित्र लगाएं। (६) दिन में अधिक ना सोए रात में अधिक देर तक जागरण ना करें। (७) गर्भ अवस्था मैं महिलाओं को बार बार सीढ़ियां उतरना चढ़ना नहीं चाहिए ना भारी वजन उठाना चाहिए तथा हाथी घोड़ा ऊंट की सवारी करना भी वर्जित है। (८)गर्भवती महिलाओं को नाव में बैठकर नदी पार करना या जलाशय की सैर करना मना है ना अकेले में किसी पेड़ के नीचे सोना चाहिए।
औषधीय गुणों से युक्त नारियल। (
हमारे देश में पाए जाने वाले फलों में नारियल अत्यंत उपयोगी फल है जो भूख के साथ-साथ प्यास भी बुझ आता है इसे शुभ फल तथा श्रीफल भी कहते हैं श्री यानी लक्ष्मी का फल एक चीनी कहावत के अनुसार नारियल में इतने गुण हैं जितने कि वर्ष में दिन नारियल का एक पेड़ उगने का मतलब है अपने परिवार के लिए खाना पीना कपड़े मकान बर्तन ईंधन आदि का इंतजाम कर लेना भारतीय लोक व्यवहार में नारियल का विशेष महत्व है यह मांगलिक फल माना जाता है इसकी गिरी जल तेल फूल जड़ तथा छाल आदि सभी औषधीय उपयोग हैं।
नारियल की गिरी##। (१)आयुर्वेद के अनुसार नारियल की गिरी शीतल पोस्ट कारक फलदायक बात पित्त रक्त विकार नाशक होती है यह देर से हजम होने वाली तथा मूत्राशय शोधक मानी जाती है। (२)नारियल की सूखी गिरी मधुर पौष्टिक स्वादिष्ट सुगंध रूचि कारक बल वीर्य वर्धक तथा मल अवरोधक होती है नारियल में उच्च कोटि का प्रोटीन होता है। (३)पत्नी पर नारियल की गिरी में चिकनाई तथा कार्बोहाइड्रेट की मात्रा बढ़ जाती है। (४) नारियल की कच्ची गिरी में अनेक एंजाइम होते हैं जो पाचन क्रिया में मददगार होते हैं बाबासीर मधुमेह गैस्टिक अल्सर में यह रामबाण औषधि है चेहरे की झुर्रियां मिटाने में यह काफी सहायक है क्योंकि इसमें चिकनाई है उस टॉर्च होता है नारियल की गिरी का दूध कुपोषण के शिकार बच्चों के लिए बहुत उपयोगी है। (५)नारियल मूत्र साफ लाता है पुरुष में वृद्धि करता है मासिक धर्म खोलता है शरीर को मोटा बनाता है तथा मस्तिष्क की दुर्बलता को दूर करता है (६)मुंह में छाले हो जाने पर या पान खाने से जीभ कट जाने पर सूखे नारियल की गिरी तथा मिश्री मिलाकर खाने से लाभ होता है। (७)कच्चे नारियल की 25 ग्राम गिरी महीन पीसकर अरंडी के तेल के साथ खाने से पेट के कीड़े निकल जाते हैं। (८) प्रातः भूखे पेट नारियल खाने से नकसीर आने बंद हो जाती है। (९) नारियल की गिरी बदाम अखरोट पोस्ता के दाने मिलाकर सेवन करने से स्मरण शक्ति तथा शरीर की शक्ति बढ़ती है। । (१०)नारियल की गिरी मिश्री के साथ खाने से प्रसव दर्द नहीं होता तथा संतान गौरव वर्ण एवं पुष्ट पुष्ट होती है। (११) नारियल की गिरी और शक्कर मिलाकर खाने से आंखों के सामान्य रोगों में लाभ होता है।






